मैं से मैं तक का सफर-a spiritual journey

इस संसार में मैं का बहुत महत्व है। इस मैं को अहंकार माना जाता है। इसी कारण हर इंसान अहंकार से बचने का प्रयास करता है। इसी कारण मैं शब्द  कम ही इस्तेमाल किया जाता है या बहुत ही कोमलता से इस्तेमाल किया जाता है। जिससे किसी को ये ना लगे की मुझमें अहंकार है। लेकिन मैं कहना सच में

विश्वास: भगवान से इंसान तक, रिश्तों की असली नींव

विश्वास जीवन का एक ऐसा हिस्सा है, जिसके बिना शायद हम एक दिन भी ठीक से नहीं जी सकते। सुबह घर से निकलते समय हमें विश्वास होता है कि हम शाम को ...